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Gum Ka Khazana
यारब तक्सीम कर सकता हूँ दी हुई तेरी सारी नेयमते मगर बाट सकता नही अपने गम
ये है वो नायाब रत्न, मिलते नही सभिको जला अपने लहू से दिए मोहब्बत को जो रखते रोशन ख़ून-ए-जिगर की दास्तान आनसूयों से मित्ताते नही मिलता उन्हीको ये नज़राना
बंद जिसमे कुछ सुनेहरी यादें लिपटे हसीं चाँदनी पल चॅम चमाते वक़्त के हीरे दौड़ रहे ज़ेहन में मेरे कैसे बाँट सकता हूँ ये अनमोल ख़ज़ाना रब तू ही मुझे बता ना
चन्द लम्हो के सूकों की आरज़ू लिए छीन लू किसीके होटो की मुस्कराहट करके उसे गमगीन
इतना कंजरफ़ मत बना मुझको यारब कही हो ना जाए तेरी तौहीन
यह जानते है सब ख़ुशी बाटने से होती दुगनी गम बाटने से कॅम फिर क्योंकार करे, ऐसे घाटे का सौदा हम
गर क़यामत के दिन तुझसे हुआ सामना तो रो पड़ेंगे तेरे दामन से लिपट के हम पर ना बाँटेंगे तुझसे भी अपने गम तुझसे भी अपने गम
$kuki
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