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I am not a poet
ना मैं कोई शायर हूँ ना कोई लेखक ना कवि फिर भी लिखता हूं, लिखता हूं अंधेरो में बैठकर मगर लक्ष्य है 'रवि'
पड़ा - लिखा हूं थोड़ा कम इसीलिए भाषा मे हाथ तंग जिन शब्दो का कुछ ग्यान मुझे ले उन्हीको निकला लड़ने जंग
तमाम उम्र ज़िंदगी ने राह मे बिछाए काँटे मगर कभी मायूस ना हुए ना हौसले किए कम लड़ते रहें ज़िंदगी से मौत के भी रोके बढ़ते क़दम
चलते रहे काँटो पर होटों पे लिए मुस्कराहट एक दिन रब भी हिल जाएगा सुन लहू सने क़दमो की आहट
मा सरस्वती की जो रही कृपा जीत लेंगे यारों शब्दो की ये लंका
ये जानते आप भी हो ये जानता रब भी है मिलते फूल उन्हीको जो चलते है काँटो पे हस हसके
ना मैं कोई शायर हूँ ना कोई लेखक ना कवि फिर भी लिखता हूं, लिखता हूं अंधेरो में बैठकर मगर लक्ष्य है 'रवि'
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